ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
[ शीर्षक : ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी ]
पहले मां बाप के हिस्से में
खुशियां लाई थी
फिर कुछ पढ़ लिखकर सपने सजाए थे
सपनो की खातिर मां बाप से दूर चली आई
कुछ अच्छा करके दिखाऊं समाज को
ऐसी मैं वो डॉक्टर बेटी थी
अस्पताल में नौकरी पाकर मरीजों संग
मैने दुख दर्द से नाता जोड़ा
किसी के दर्द को अनदेखा न किया
सबके गम को खुशियों से जोड़ा
ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
पल रहे मरहम के केंद्र में
छुपे बैठे हैवान, दरिंदे और जानवर
जिन्हे मैं देख ना पाई
बलात्कारी , शोषण और अत्याचारी लोगो
को मैं पहचान न पाई
ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
मुझे तो जबरदस्ती खींचा गया
कपड़े फाड़े गए , तन बदन को जिंदा नोचा गया
हाथ छुड़ाकर जो भागना चाहा
मुझे हवस का शिकार बनाया गया
ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
विश्वास उठ गया संसार से था
आंखो से आंसुओ की धारा बह चली
मेरी इज्जत आबरू लूटी गई
मेरे गुप्तांग छेड़े गए
अश्लीलता के तीर छोड़े गए
मैं कहां तक बचती
ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
मैं जितना बचा सकती थी अपने इस
पवित्र शरीर को, मैं बचा न पाई
मैं नारी हूं साहब मैं ताकत दिखा ना पाई
ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
मुंह से निकलती चीखों को
गला सहित दबाया गया
मेरे जिस्म को छील छीलकर
निशाना बनाया गया
ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
अब कहीं नहीं मैं सुरक्षित मां बाबू जी
अब नही सुरक्षित ए सरकार तेरी बेटियां
जिस्म के भूखों ने बांध दी है
बेटियों के पैरो में बेड़ियां
हंसती खेलती दुनिया जिसकी हो
गई थी बर्बाद
ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
अब नही रही मैं दुनिया में
तो सुकून होगा
लेकिन याद रख ए इंसान
न रुका ये जुल्म, दरिंदगी और अत्याचार
का पहिया
कल तेरे साथ भी होगा
मैं किस्मत की मारी
ऐसी मैं डॉक्टर बेटी थी
- गुड्डू मुनीरी सिकंदराबादी
- दिनांक : 17/08/2024
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Babita patel
17-Jan-2025 07:21 PM
V nice
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kashish
29-Sep-2024 01:22 PM
V sad
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GUDDU MUNERI
22-Sep-2024 11:34 PM
Thank you
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